मैं रिया हूँ, एक २५ साल की जवान औरत, शादीशुदा। मेरा पति अक्सर बाहर रहता है काम के सिलसिले में, और घर में सिर्फ मैं और ससुर जी। ससुर जी उम्र में ५० के आसपास हैं, लेकिन उनका शरीर अभी भी ताकतवर है – चौड़ी छाती, मोटे बाजू, और वो नजरें जो कभी-कभी मेरी बॉडी पर टिक जाती हैं। मैं जानती थी कि वो मुझे चुपके से घूरते हैं, खासकर जब मैं साड़ी पहनकर घर के काम करती हूँ। मेरी कमर पतली है, चूचियाँ भरी हुईं, और गांड गोल-मटोल। मैंने सोचा क्यों ना उन्हें थोड़ा उकसाऊँ, देखूँ क्या होता है।
एक शाम, पति फिर से बाहर चला गया था। मैंने हल्की सी ट्रांसपेरेंट नाइटि पहनी, जो मेरी काली ब्रा और पैंटी साफ दिखा रही थी। ससुर जी लिविंग रूम में अखबार पढ़ रहे थे। मैं किचन से पानी का गिलास लेकर आई, और जानबूझकर उनके पास झुक गई। मेरी चूचियाँ उनके चेहरे के पास आ गईं। ‘ससुर जी, पानी पिएंगे?’ मैंने मीठी आवाज में कहा। वो चौंके, उनकी नजरें मेरी क्लिवेज पर अटक गईं। ‘नहीं बेटी, ठीक हूँ,’ लेकिन उनकी आँखें हिल ही नहीं रही थीं।
मैं मुस्कुराई और सोफे पर उनके बगल में बैठ गई। मेरी जांघ उनके पैर से सट गई। ‘आज गर्मी बहुत है ना ससुर जी? आपकी कमीज भी गीली हो गई है।’ मैंने कहा और उनकी कमीज पर हाथ फेरा। उनका शरीर सख्त था, और मैं महसूस कर सकी कि उनका लंड थोड़ा तन रहा था। वो असहज हो गए, लेकिन हटे नहीं। ‘रिया, तुम्हें शर्म नहीं आती? मैं तुम्हारा ससुर हूँ।’ उनकी आवाज काँप रही थी।
‘शर्म क्यों ससुर जी? घर में तो हम अकेले हैं। पति जी भी तो महीनों बाहर रहते हैं।’ मैंने कहा और अपना हाथ उनकी जांघ पर रख दिया। धीरे-धीरे ऊपर की तरफ सरकाया। उनका लंड अब पूरी तरह खड़ा हो चुका था, पैंट में उभरा हुआ। ‘देखिए, आपका ये तो कुछ और कह रहा है।’ मैंने हँसते हुए कहा। वो साँस लेने लगे तेज। ‘रिया, ये गलत है… लेकिन…’ वो रुके। मैंने मौका देखा और उनकी पैंट का हुक खोल दिया। उनका मोटा लंड बाहर निकल आया – काला, मोटा, नसों वाला, सिरा चमकदार।
‘वाह ससुर जी, कितना बड़ा है! पति जी का तो आधा भी नहीं।’ मैंने कहा और अपना हाथ पकड़ लिया। ऊपर-नीचे करने लगी। वो कराहने लगे, ‘ओह रिया… मत करो… अरेह!’ लेकिन उनका हाथ मेरी चूची पर चला गया। उन्होंने ब्रा के ऊपर से दबाई। मैंने नाइटि ऊपर की और ब्रा खींच दी। मेरी गुलाबी चूचियाँ बाहर आ गईं, निप्पल सख्त। ससुर जी ने एक को मुँह में ले लिया, चूसने लगे। जोर-जोर से चूसे, काटा भी थोड़ा। ‘आह ससुर जी, ऐसे ही… चूसो मेरी चुचियाँ।’
मैंने उनका लंड जोर से हिलाया, फिर झुककर चाटा। जीभ से सिरा चाटा, फिर मुँह में लिया। पूरा अंदर तक, चूसने लगी। ससुर जी के हाथ मेरी गांड पर – पैंटी नीचे सरका दी। मेरी चूत गीली हो चुकी थी, रस टपक रहा। उन्होंने उंगली डाली, ‘रिया तेरी चूत कितनी गर्म है! कितना रस!’ मैं कराही, ‘हाँ ससुर जी, आपके लंड के लिए ही तो गीली हुई। चोदो मुझे, अपनी बहू को चोदो।’
वो उठे, मुझे सोफे पर लिटाया। मेरी टाँगें फैलाईं, चूत पर लंड का सिरा रगड़ा। ‘लो रिया, ले लो ससुर का लंड।’ और धक्का मारा। पूरा अंदर चला गया। ‘आह्ह्ह! ससुर जी, कितना मोटा है… फाड़ दिया!’ मैं चीखी। वो पागलों की तरह चोदने लगे – जोरदार धक्के, चूत में घुसते-निकलते। मेरी चूचियाँ उछल रही थीं। ‘चोदो ससुर जी, अपनी बहू की चूत फाड़ो! हाँ, ऐसे ही!’ मैं चिल्लाई।
उन्होंने मुझे पलटा, डॉगी स्टाइल में। गांड ऊपर की, चूत खुली। फिर से लंड घुसाया, गांड पर थप्पड़ मारे। ‘तेरी गांड कितनी रसीली है रिया! रोज देखता हूँ, चोदने को जी चाहता था।’ वो बोले और तेज चोदे। मैं का काम से झकझक रही थी, चूत सिकुड़ रही। ‘आह ससुर जी, मैं झड़ रही हूँ… कम मत होना!’ और मैं ऑर्गेज्म में काँपने लगी। मेरा रस उनके लंड पर बहा।
वो और तेज हुए, ‘अब मैं भी… ले मेरी रंडी बहू!’ और गर्म गर्म वीर्य मेरी चूत में छोड़ दिया। पूरा भरा दिया। हम दोनों पसीने से तर, लिपटे रहे। ‘ससुर जी, ये तो शुरुआत है। पति जब भी बाहर जाए, आपकी बहू आपकी है।’ मैंने कहा। वो मुस्कुराए, ‘हाँ बेटी, अब रोज चुदाई होगी।’
उस रात हम बेडरूम में गए। ससुर जी ने मुझे नंगा कर दिया। मेरी बॉडी पर किस किए, हर जगह चाटा। फिर मैंने उन्हें सुलाया और ऊपर चढ़ गई। उनका लंड फिर खड़ा था। मैंने चूत में बैठा लिया, ऊपर-नीचे होने लगी। ‘हाँ रिया, चोद मुझे… अपनी ससुर की चोद!’ वो बोले। मैं तेज कूदने लगी, चूचियाँ हिल रही। चूत में घर्षण से आग लग रही। फिर वो नीचे से धक्के मारने लगे। हम दोनों फिर झड़े।
अगले दिन सुबह, किचन में। मैं चाय बना रही थी, सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में। ससुर जी पीछे से आए, ब्लाउज खोला, चूचियाँ दबाईं। ‘रिया, सुबह- सुबह चुदाई हो जाए?’ मैं हँसी, ‘हाँ ससुर जी।’ उन्होंने पेटीकोट ऊपर किया, चूत में उंगली डाली। फिर लंड निकाला और दीवार से सटा कर चोदा। खड़े-खड़े, तेज धक्के। ‘आह… ससुर जी, चोदो… किचन में ही चोदो अपनी बहू को!’ मैं कराही। उनका वीर्य फिर मेरी चूत में।
इस तरह, हमारी चुदाई की कहानी चल पड़ी। पति को शक भी नहीं हुआ। ससुर जी का लंड मेरी चूत का आदी हो गया, और मैं उनकी उकसाहट का शिकार। गर्म देसी चुदाई, परिवार के अंदर ही।