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Phle Chachi Aur Fir Unki Beti Choda | Desi Tales

Published On: March 23, 2026
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Phle Chachi Aur Fir Unki Beti Choda – गर्मियों की वह छुट्टी अमित के जीवन में एक अनोखा मोड़ लाई। शहर की चकाचौंध से दूर, अपने ननिहाल के गांव में पहुंचते ही उसे लगा जैसे कोई पुरानी यादें जाग उठी हों। अमित 25 साल का युवक था, नौकरीपेशा, लेकिन गांव की सादगी उसे हमेशा बुलाती थी। इस बार का दौरा खास था क्योंकि उसके नाना की बीमारी के बाद चाची मीरा और उनकी बेटी रिया अकेली रह गई थीं।

मीरा चाची 45 की उम्र में भी अपनी गोरी रंगत, लहराती काली जुल्फों और पूर्णांग काया से किसी परिपक्व सौंदर्य की मिसाल थीं। उनकी आंखों में एक गहरी उदासी थी, जो विधवा जीवन की मार झेल रही थी। रिया, 22 साल की, कॉलेज की छात्रा, पतली-दुबली लेकिन आकर्षक लंबी टांगें, उभरी हुई स्तन और शरारती मुस्कान वाली लड़की, जो अमित को बचपन से ‘भैया’ कहकर चिढ़ाती थी।

अमित जब स्टेशन पर उतरा, तो मीरा चाची खुद गाड़ी लेकर आईं। ‘अमित बेटा, कितने दिनों बाद आए हो! घर चलो, सब इंतजार कर रहा है,’ उन्होंने कहा, उनकी साड़ी की परतों से हल्की महक आ रही थी। रिया पीछे बैठी मुस्कुराई, ‘भैया, शहर की कहानियां सुनाओगे न?’ अमित ने सिर हिलाया, लेकिन उसकी नजर रिया की सलवार के ऊपरी हिस्से पर ठहर गई, जहां से उसकी कमर की लचक झलक रही थी। घर पहुंचते ही चाय की चुस्कियां लेते हुए बातें हुईं। मीरा चाची ने पुरानी यादें ताजा कीं, ‘तुम्हारे नाना जी कितना प्यार करते थे तुमसे। अब तो बस हम दोनों हैं।’ उनकी आवाज में एक कोमलता थी, जो अमित के दिल को छू गई।

पहले दो-तीन दिन शांत बीते। अमित सुबह-सुबह खेतों में टहलता, नदी के किनारे बैठकर मछलियां देखता। मीरा चाची घर संभालतीं, रिया किताबें पढ़ती। लेकिन एक शाम, जब आकाश में बादल घिर आए, सब बदल गया। तेज बारिश शुरू हो गई। अमित बाहर था, भीग रहा था। मीरा चाची ने उसे पुकारा, ‘अंदर आ जाओ अमित, बीमार पड़ जाओगे!’ दरवाजा खोलते ही अमित की नजरें उनकी भीगी साड़ी पर पड़ी। कपड़ा शरीर से चिपक गया था, उनकी भरी हुई छातियां साफ उभर आईं, निप्पल्स की रूपरेखा तक दिख रही थी। अमित का गला सूख गया। ‘चाची, आप भी तो भीग गईं,’ उसने कहा, लेकिन उसकी नजरें हट न सकीं।

मीरा हल्के से हंसीं, ‘बारिश का क्या, अचानक आ जाती है। चलो, नहा लो।’ वे रसोई की ओर चली गईं, लेकिन अमित का मन अशांत हो गया। रात को बिस्तर पर लेटे हुए वह मीरा चाची के शरीर की कल्पना करने लगा – उनकी मुलायम त्वचा, गर्म सांसें। अगली सुबह, नाश्ते पर मीरा ने शिकायत की, ‘अमित, मेरी कमर में दर्द हो रहा है। कल रात सोते वक्त उलझ गई। मालिश कर दोगे?’ अमित का दिल जोर से धड़का। ‘हां चाची, क्यों नहीं।’ शाम को कमरे में मीरा लेट गईं। उन्होंने साड़ी की चोली थोड़ी ढीली की, पीठ नंगी हो गई – चिकनी, सफेद, जैसे दूध से नहाई हुई। अमित ने तेल गर्म किया और हाथ फेरने लगा। उसके स्पर्श से मीरा की सांसें तेज हो गईं। ‘आह अमित, कितना राहत मिल रही है। थोड़ा नीचे भी,’ उन्होंने कहा।

अमित के हाथ कमर पर पहुंचे, फिर नितंबों के पास। मीरा की सिसकी निकली, ‘हम्म… अच्छा लग रहा।’ अमित का लंड कड़क हो गया, पैंट में दबाव महसूस हो रहा था। वह और जोर से दबाने लगा। मीरा मुड़ीं, उनकी आंखों में एक अजीब चमक थी। ‘अमित, तुम्हारा स्पर्श… कुछ अलग सा है।’ अमित हिम्मत जुटा कर उनके करीब आया। धीरे से उनके गाल को छुआ, फिर होंठों पर किस कर दिया। मीरा पहले सिहर गईं, लेकिन फिर जवाब में अमित को कसकर पकड़ लिया। उनके होंठ नरम थे, जीभ लिपट गई, जैसे सालों की प्यास बुझ रही हो। अमित ने उनकी साड़ी खींची, चोली खोली। मीरा की भारी-भरकम छातियां बाहर उछल आईं – गहरे गुलाबी निप्पल्स तने हुए। अमित ने उन्हें मुंह में लिया, चूसा, काटा। मीरा कराहीं, ‘ओह अमित… धीरे से… लेकिन जारी रखो।’

अमित ने पूरी साड़ी उतार दी। मीरा की चूत घनी बालों से ढकी थी, लेकिन गीली चमक रही थी। वह नीचे झुका, जीभ से चाटने लगा – क्लिटोरिस पर, होंठों के बीच। मीरा के पैर कांपने लगे, ‘आह… अमित… कभी ऐसा नहीं हुआ… मजा आ रहा है!’ अमित का 9 इंच का मोटा लंड फटने को तैयार था। उसने पैंट उतारी, मीरा ने उसे देखा और आश्चर्य से बोलीं, ‘बेटा, इतना विशाल! आओ, मुझे चखने दो।’ उन्होंने लंड मुंह में लिया, चूसा, जीभ घुमाई। अमित की कमर हिलने लगी, ‘चाची… आपकी जीभ जादू कर रही।’ फिर अमित ऊपर चढ़ा, लंड चूत के मुंह पर रगड़ा। मीरा बोलीं, ‘डाल दो अमित, भर दो मुझे।’ एक जोरदार धक्के से लंड अंदर सरक गया। मीरा की चूत गर्म, नरम लेकिन टाइट – सालों बाद खुल रही थी।

वे चीखीं, ‘हां… जोर से पेलो!’ अमित ने तेज धक्के मारे, कमरा थप्पड़ों की आवाज से गूंजा। मीरा की छातियां लहरा रही थीं, अमित उन्हें मसल रहा था। ‘चाची, आपकी बॉडी स्वर्ग जैसी है,’ अमित फुसफुसाया। मीरा ने उसके पीठ पर नाखून गाड़े, ‘तुम्हारा लंड… आग लगा रहा।’ आखिरकार, अमित झड़ पड़ा – गर्म वीर्य चूत की गहराई में भर दिया। मीरा भी उछलकर ऑर्गेज्म में डूब गईं, उनके शरीर से कंपकंपी दौड़ी। वे घंटों लिपटे रहे, पसीने और प्यार में तरबतर।

अगले दिन सुबह, अमित को लगा रिया कुछ जान गई है। नाश्ते पर रिया की नजरें अमित पर ठहर रही थीं, शर्मीली लेकिन जिज्ञासु। ‘भैया, कल रात चाची के कमरे से आवाजें आ रही थीं। सब ठीक तो है?’ अमित लजा गया, लेकिन रिया मुस्कुराई। शाम को, जब मीरा बाजार गईं, रिया अमित के पास आई। ‘भैया, मैंने सब देख लिया। चाची के साथ… आपका प्यार। मुझे जलन हो रही है, लेकिन… मुझे भी वैसा ही छुआव चाहिए।’ अमित आश्चर्यचकित हुआ। रिया ने अपना सूट उतार दिया – उसकी युवा बॉडी नंगी हो गई। छोटी लेकिन सख्त छातियां, पतली कमर, गुलाबी चूत बिना बालों की। अमित ने उसे गले लगाया, ‘रिया, तुम तैयार हो?’ रिया बोली, ‘हां भैया, सिखाओ मुझे प्यार।’

अमित ने उसके होंठ चूमें, गर्दन पर किस किए, फिर छातियां चूसीं। रिया सिहर उठी, ‘आह भैया… कितना गुदगुदी हो रही।’ अमित की उंगली रिया की चूत में घुसी – गीली, संकुचित। रिया कराही, ‘और अंदर… हां!’ अमित ने लंड निकाला। रिया ने डरते हुए पकड़ा, ‘इतना लंबा… चूसूं?’ अमित ने सिर हिलाया। रिया ने मुंह खोला, चूसा – कच्चा लेकिन उत्साही। अमित की लार टपकने लगी। फिर अमित ने रिया को बिस्तर पर लिटाया।

उसके पैर फैलाए, लंड चूत पर सेट किया। ‘पहली बार दर्द होगा रिया, लेकिन प्यार भी।’ धीरे से धक्का मारा – रिया चीखी, ‘आह भैया! दर्द… लेकिन रुको मत।’ थोड़ा खून निकला, लेकिन अमित धीरे-धीरे गति बढ़ाई। रिया की चूत इतनी टाइट कि लंड को निचोड़ रही। ‘हां भैया, अब मजा आ रहा… तेज!’ रिया चिल्लाई। अमित ने पेला, छातियां चूसीं, निप्पल्स काटे। रिया के कराहे मीठे थे, कमरा फिर से जीवंत हो गया।

तभी मीरा लौट आईं। दरवाजा खोलकर देखा तो हंस पड़ीं। ‘अमित, अब मेरी राजकुमारी भी? आओ, मैं भी शामिल हो जाऊं।’ मीरा ने कपड़े उतारे, तीनों नंगे हो गए। मीरा ने रिया की चूत चाटी, जबकि अमित पीछे से मीरा की गांड में लंड डाला। ‘आह चाची, आपकी गांड कितनी गर्म!’ अमित बोला। मीरा सिसकीं, ‘पहली बार गांड में… लेकिन तुम्हारे लिए सब।’ रिया ने अमित का लंड चूसा, मीरा की छातियां दबीं। तीनों एक-दूसरे से लिपटे, बदन रगड़ते। अमित ने रिया में झड़ दिया, गर्म स्पर्म उसकी युवा चूत भर दिया। फिर मीरा को पलटा, उनकी चूत में डाला। रात भर चुदाई चली – कभी अमित रिया को डॉगी स्टाइल में पेलता, मीरा देखतीं; कभी मीरा अमित को राइड करतीं, रिया चूमती।

बारिश की रातें और रोमांचक हो गईं। एक शाम, नदी किनारे तीनों घूमने गए। पानी में उतरकर नंगे हो गए। अमित ने रिया को गोद में उठाया, पानी में लंड चूत में डाल दिया। रिया चीखी, ‘भैया, पानी में… कितना अलग मजा!’ मीरा पास खड़ीं, अमित के लंड को सहलातीं। फिर अमित ने मीरा को लिटाया, उनकी गांड ऊपर करके पेला। पानी छलक रहा था, उनकी कराहें हवा में घुल रही। घर लौटकर, बाथरूम में नहाते हुए फिर शुरू – अमित ने दोनों को एक साथ चूदा, कभी चूत में, कभी मुंह में।

रोमांस का पुट भी था। अमित मीरा को जंगल से फूल लाता, रिया को सितारों के नीचे किस करता। वे रातें बातों में बिताते – मीरा अपनी जिंदगी की उदासी शेयर करतीं, ‘अमित, तुम्हारे आने से जीवन फिर खिल उठा।’ रिया कहती, ‘भैया, तुम्हारा प्यार हमें जोड़ रहा।’ लेकिन शारीरिक आकर्षण ही मुख्य था। मीरा की चूत गहरी और अनुभवी, रिया की ताजी और उत्साही। अमित दोनों को बराबर संतुष्ट करता – कभी मीरा को मिशनरी में गहराई से, रिया को काउगर्ल में ऊपर से। एक दिन, खेत में, मीरा को घास पर लिटाकर चोदा, रिया पहरा देती। ‘चाची, आपकी सिसकियां… संगीत जैसी,’ अमित बोला।

एक रात, तीनों बिस्तर पर। अमित बीच में, मीरा बाईं ओर, रिया दाईं। अमित ने मीरा की चूत में उंगली डाली, रिया का लंड चूसा। फिर स्विच – मीरा अमित को राइड करने लगीं, उनकी भारी छातियां उछल रही। रिया नीचे से चाटती। अमित ने मीरा की गांड थपथपाई, ‘चाची, आपकी बॉडी अमर है।’ झड़ने का समय आया – अमित ने दोनों के मुंह पर स्पर्म छिड़का, वे चाटकर साफ कीं। सुबह तक वे थककर सो गए, लेकिन प्यार की गर्माहट बनी रही।

छुट्टियां खत्म होने लगीं। अमित ने कहा, ‘चाची, रिया, मैं लौटूंगा। ये प्यार हमेशा रहेगा।’ मीरा ने आंसू भरी आंखों से कहा, ‘बेटा, तुम्हारा स्पर्श हमारी जिंदगी बदल गया।’ रिया ने किस किया, ‘भैया, अगली बार और मजा।’ अमित शहर लौटा, लेकिन यादें ताजा रहीं – मीरा की गर्माहट, रिया की मासूमियत। गांव की वह छुट्टी, प्यार और वासना का मेल, अमित के दिल में हमेशा बसी रही।

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