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Bhanji Ki Kuwari Chut Ki Safai Sex Story | Desi Tales

Published On: March 23, 2026
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Bhanji Ki Kuwari Chut Ki Safai Sex Story – मेरा नाम मीरा है। अभी मेरी उम्र 24 साल की है। शादी तो अभी तक नहीं हुई, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि मेरी चूत कभी छुई भी नहीं गई। वो तो 18 साल की उम्र में ही फाड़ दी गई थी। वो दिन याद आते ही मेरी बॉडी में एक अजीब सी सिहरन दौड़ जाती है। आज भी सोचती हूं तो गीली हो जाती हूं। मैं एक छोटे से शहर में रहती हूं, जहां सब कुछ सादा सादा है, लेकिन मेरी जिंदगी में वो एक घटना ने सब कुछ बदल दिया।

मेरे मामा का नाम राकेश है। वो मेरी मां के छोटे भाई हैं और हमारा घर उनके घर से बस कुछ किलोमीटर दूर था। मामा की उम्र उस वक्त करीब 35 साल रही होगी। वो एक सरकारी नौकरी करते थे, लेकिन छुट्टियों में गांव आते तो घर में मस्ती मचाते। मामा हमेशा मुझे प्यार करते थे, लेकिन 18 साल की होने पर उनका व्यवहार कुछ बदल गया। शायद मेरी बॉडी अब जवां हो चुकी थी – छोटे छोटे स्तन जो अब भरपूर उभर आए थे, कूल्हे जो घुमाने लायक हो गए थे, और वो चेहरा जो मासूमियत से भरा था।

एक गर्मी की छुट्टी थी। स्कूल खत्म हो चुका था, और मैं घर पर बोर हो रही थी। मां ने कहा, ‘मीरा, तू मामा के पास चली जा। वहां कुछ दिन रुक ले।’ मैं खुश हो गई। मामा का घर अकेला था, क्योंकि मामी शहर में नौकरी करती थीं और अक्सर बाहर रहतीं। तो मैं बैग पैक करके चली गई। मामा ने मुझे देखते ही गले लगा लिया। ‘अरे वाह, मीरा बेटी, कितनी बड़ी हो गई!’ उनका हाथ मेरी पीठ पर फेरा, और मुझे लगा जैसे वो थोड़ा ज्यादा ही देर तक दबाए रखे।

पहले दो दिन तो सब नॉर्मल रहा। मामा मुझे घुमाने ले जाते, आइसक्रीम खिलाते। लेकिन तीसरे दिन सुबह, मैं नहाने गई। गर्मी ज्यादा थी, तो मैंने सिर्फ पतली साड़ी पहनी थी अंदर। बाथरूम में पानी डाल रही थी कि अचानक दरवाजा खुला। मामा खड़े थे, हाथ में तौलिया। ‘ओह सॉरी मीरा, मैं सोचा तू अभी आई होगी।’ लेकिन उनकी नजरें मेरी बॉडी पर टिक गईं। मेरी साड़ी भीग रही थी, और मेरे स्तन की शक्ल साफ दिख रही थी। मैं शरमा गई, लेकिन उन्होंने दरवाजा बंद नहीं किया। ‘चल, मैं तेरी पीठ पर साबुन लगाता हूं। बचपन से तो लगाता आया हूं।’

मैं हिचकिचाई, लेकिन मामा के सामने कैसे मना करूं। मैंने साड़ी का पल्लू हटाया, और वो मेरी पीठ पर साबुन फेरने लगे। उनके हाथ गर्म थे, और धीरे धीरे वो नीचे सरकने लगे। मेरी कमर पर, फिर कूल्हों के पास। ‘मामा, बस…’ मैं बोली, लेकिन वो हंसे, ‘अरे शरमा क्या रही है। तू तो मेरी भांजी है।’ लेकिन उनका लंड, जो पैंट में उभरा हुआ था, मुझे छू गया। मैं चौंक गई। पहली बार किसी मर्द का वो अंग महसूस किया।

नहाने के बाद मैंने साड़ी ठीक की, लेकिन मन में कुछ अजीब चल रहा था। दोपहर में मामा ने कहा, ‘मीरा, तेरी चूत की सफाई करनी चाहिए। लड़कियां बड़े हो जाती हैं, लेकिन कभी कभी गंदगी जम जाती है। मैं डॉक्टर हूं ना, देख लूं।’ मैं हंस पड़ी, सोचा मजाक है। लेकिन शाम को वो सीरियस हो गए। ‘चल, कमरे में आ। मैं तुझे सिखाता हूं कैसे खुद साफ रखें।’

मैं उनके कमरे में गई। मामा ने दरवाजा बंद किया और मुझे बेड पर बिठाया। ‘पैंटी उतार मीरा। शरम मत कर।’ मेरा दिल धड़क रहा था। मैंने धीरे से पैंटी नीचे सरकाई। मेरी चूत साफ थी, लेकिन बाल थोड़े उगे हुए थे। मामा ने घुटनों पर बैठकर देखा। ‘हम्म, कुंवारी है, लेकिन सफाई की जरूरत है।’ उन्होंने एक कटोरी में गुनगुना पानी लिया, जिसमें कोई तेल मिला था। फिर उंगली डालकर मेरी चूत पर फेरने लगे।

‘आह मामा…’ मैं सिसकारी भर उठी। उनकी उंगली मेरी चूत की दरार में घुस रही थी। धीरे धीरे वो अंदर तक ले गए। ‘देख, यहां गंदगी है। साफ करनी पड़ेगी।’ मैं तड़प रही थी। कभी महसूस नहीं किया था ऐसा। मेरी चूत गीली हो गई। मामा ने दूसरी उंगली भी डाली। ‘मीरा, तू कितनी टाइट है। कुंवारी चूत की महक ही अलग है।’ वो उंगलियां अंदर बाहर करने लगे। मैं चादर पकड़कर कराह रही थी। ‘मामा, क्या कर रहे हो… ये गलत है।’

लेकिन वो रुके नहीं। ‘गलत क्या? मैं तेरी सफाई कर रहा हूं।’ फिर उन्होंने अपना मुंह झुकाया और जीभ से चाटने लगे। मेरी चूत पर उनकी जीभ घूम रही थी। क्लिटोरिस को चूस रहे थे। मैं पागल हो गई। बॉडी कांप रही थी। ‘ओह मामा… हां… और…’ पहली बार ऑर्गेज्म आया। मैं चिल्लाई और चूत से रस निकल गया। मामा ने सब चाट लिया। ‘अब साफ हो गई। लेकिन अभी पूरी सफाई बाकी है।’

वो उठे और अपनी पैंट उतार दी। उनका लंड बाहर आ गया – मोटा, लंबा, सिरा लाल। मैं डर गई। ‘ये क्या मामा?’ ‘ये तेरी चूत साफ करने का ब्रश है।’ वो बोले और मुझे लिटा दिया। मेरी टांगें फैलाईं। लंड का सिरा मेरी चूत पर रगड़ने लगे। ‘मीरा, दर्द होगा थोड़ा, लेकिन मजा भी आएगा।’ फिर धक्का मारा। आह! चूत फट गई। खून निकला। मैं रोने लगी। लेकिन मामा रुके नहीं। धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगे।

पहले दर्द था, लेकिन फिर मजा आने लगा। उनका लंड मेरी चूत को भर रहा था। ‘मीरा, तेरी कुंवारी चूत कितनी अच्छी है। टाइट पकड़ रही है।’ वो तेज चोदने लगे। मैं भी अब उछल रही थी। ‘मामा, हां… चोदो मुझे… सफाई करो।’ कमरे में सिर्फ हमारी सांसें और चुदाई की आवाजें। आखिर में मामा ने चिल्लाकर cum किया। गर्म गर्म वीर्य मेरी चूत में भर गया। वो बाहर निकले, और चूत से खून और cum मिला हुआ बह रहा था।

उस रात मैं उनके बेड पर ही सोई। सुबह उठी तो मामा फिर से मेरी चूत चाट रहे थे। ‘अब रोज सफाई होगी मीरा। तू मेरी हो गई।’ अगले कुछ दिन हमने और भी बहुत कुछ किया। कभी डॉगी स्टाइल में चोदा, कभी मेरे मुंह में लंड डाला। मैंने blowjob सीखा, उनका cum निगला। मेरी कुंवारी चूत अब पूरी तरह से उनकी थी।

लेकिन छुट्टियां खत्म हुईं। मैं घर लौटी, लेकिन वो यादें मेरे साथ रहीं। आज 24 साल की हूं, अभी तक कुंवारी हूं मतलब शादी नहीं हुई, लेकिन चुदाई का अनुभव तो भरपूर है। कभी कभी मामा से मिलती हूं, और फिर वही सफाई का बहाना। मेरी जिंदगी अब सेक्स से भरी है, और मैं खुश हूं।

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