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बुआ की बेटी को चोदकर आंसू निकाले (Bua ki beti sex story)

Published On: March 25, 2026
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Bua ki beti sex story, Rishtedar ladki sex story, Cousin sex story गर्मियों की छुट्टियां थीं। आर्यन, एक 22 साल का युवक, अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद गांव लौटा था। शहर की चकाचौंध से दूर, हरे-भरे खेतों और शांत नदियों के बीच बसा यह गांव उसके लिए हमेशा खास रहा। लेकिन इस बार कुछ अलग था। उसकी बुआ, सुनीता, ने उसे बुलाया था। सुनीता बुआ एक विधवा थीं, जिनका पति कई साल पहले गुजर चुका था। उनके साथ उनकी बेटी, नेहा, रहती थी। नेहा 20 साल की थी, कॉलेज में पढ़ती थी और गांव की सादगी में भी एक चुलबुली आकर्षण लिए हुए थी।

आर्यन जब स्टेशन पर उतरा, तो नेहा ही उसे लेने आई थी। वह एक साधारण सलवार कमीज में थी, लेकिन उसके बाल खुले थे, जो हवा में लहरा रहे थे। ‘भैया!’ नेहा ने उत्साह से चिल्लाया और आर्यन को गले लगा लिया। उसकी मुलायम बॉडी आर्यन के सीने से सटी, और एक पल के लिए आर्यन का दिल धड़क गया। नेहा की खुशबू, उसके बालों की वो मीठी सी महक, सब कुछ उसे बेचैन कर गया। ‘कितने दिन बाद आए हो, भैया। घर चलो, मां इंतजार कर रही हैं।’

घर पहुंचते ही सुनीता बुआ ने आर्यन को जोरदार आलिंगन दिया। ‘बेटा, कितना बड़ा हो गया तू। शहर ने तुझे बदल दिया है क्या?’ उन्होंने हंसते हुए कहा। घर छोटा सा था, लेकिन प्यार से भरा। नेहा ने आर्यन का सामान उठाया और उसे अपने कमरे की ओर ले गई। ‘भैया, आज से तुम मेरे साथ ही सोओगे। मां कहती हैं कि पुराने दिनों की तरह।’ नेहा की आंखों में शरारत चमक रही थी।

रात हुई। गांव की शांति में दोनों एक ही बिस्तर पर लेटे। नेहा ने हल्की सी नाइट गाउन पहन रखी थी, जो उसके कर्व्स को हल्का सा उभार रही थी। आर्यन ने अपनी शर्ट उतार दी थी, सिर्फ अंडरवियर में था। ‘भैया, शहर में कोई गर्लफ्रेंड है?’ नेहा ने अचानक पूछा। आर्यन हंस पड़ा। ‘नहीं रे, पढ़ाई में व्यस्त रहता हूं। तू बता, कॉलेज में कोई स्पेशल तो नहीं?’ नेहा ने सिर हिला दिया। ‘नहीं, बस दोस्त। लेकिन भैया, तुम्हें देखकर लगता है जैसे कोई राजकुमार आ गया हो।’

धीरे-धीरे बातें बढ़ीं। नेहा ने अपना हाथ आर्यन के कंधे पर रख दिया। उसकी उंगलियां नरम थीं, और स्पर्श से आर्यन को गुदगुदी सी हुई। ‘भैया, याद है बचपन में हम नदी में नहाने जाते थे? तुम हमेशा मुझे गोद में उठा लेते थे।’ नेहा की आवाज में एक मासूमियत थी, लेकिन आंखों में कुछ और। आर्यन ने मुस्कुराया। ‘हां, तू तो हमेशा शरारती रही है।’ रात गहराई, लेकिन नींद नहीं आ रही थी। नेहा करीब सरक आई। उसके स्तन आर्यन की पीठ से छू गए। आर्यन का शरीर सुलग उठा।

अगले दिन सुबह, सुनीता बुआ खेतों पर गईं। घर में सिर्फ आर्यन और नेहा थे। नेहा ने नाश्ता बनाया। ‘भैया, आज नदी चलें?’ उसने कहा। आर्यन सहमत हो गया। नदी किनारे पहुंचे। पानी साफ था, चारों तरफ हरी घास। नेहा ने अपनी सलवार कमीज उतार दी, सिर्फ इनरवियर में रह गई। उसके गोरे बदन पर सूरज की किरणें चमक रही थीं। स्तन भरे हुए, कमर पतली, और नितंब गोल। आर्यन की नजरें ठहर गईं। ‘क्या देख रहे हो, भैया?’ नेहा ने शरमाते हुए कहा, लेकिन आंखों में चंचलता थी।

वे पानी में उतरे। नेहा ने आर्यन को पानी उछाला। हंसी-मजाक में आर्यन ने उसे पकड़ लिया। नेहा उसके सीने से सटी। पानी में उनके शरीर एक-दूसरे से रगड़ खा रहे थे। आर्यन का लंड सख्त हो गया, नेहा की जांघ से छू गया। नेहा चौंकी, लेकिन पीछे नहीं हटी। ‘भैया…’ उसकी आवाज कांप रही थी। आर्यन ने उसके होंठों पर उंगली रख दी। ‘शशश… कुछ मत बोल।’ फिर धीरे से उसके होंठ चूम लिए। नेहा ने आंखें बंद कर लीं। चुम्बन गहरा हो गया। जीभें मिलीं, सांसें तेज।

नदी किनारे वे बाहर आए। नेहा की ब्रा गीली थी, निप्पल्स साफ दिख रहे थे। आर्यन ने उसे गले लगाया। हाथ कमर पर, फिर ऊपर की ओर। नेहा की सांसें उखड़ रही थीं। ‘भैया, यह गलत है न?’ उसने फुसफुसाया। आर्यन ने कहा, ‘प्यार कभी गलत नहीं होता।’ उसने ब्रा खोल दी। नेहा के स्तन बाहर आ गए – गोल, भूरे निप्पल्स तने हुए। आर्यन ने उन्हें चूमा, चूसा। नेहा कराह उठी। ‘आह… भैया…’ उसके हाथ आर्यन के बालों में।

आर्यन ने नेहा को घास पर लिटा दिया। उसकी पैंटी उतारी। नेहा की चूत गीली थी, बाल हल्के। आर्यन ने उंगली डाली। नेहा का शरीर सिहर उठा। ‘उफ्फ… भैया, धीरे…’ वह बोली। आर्यन ने जीभ से चाटना शुरू किया। नेहा की चूत का रस मीठा था। वह चिल्लाई, ‘हां… वहां… आह!’ orgasm आ गया। नेहा कांप रही थी।

अब नेहा ने आर्यन की शॉर्ट्स उतारी। उसका लंड बाहर आया – मोटा, लंबा, सख्त। नेहा ने उसे पकड़ा। ‘कितना बड़ा है, भैया।’ उसने मुस्कुराया। फिर मुंह में ले लिया। चूसने लगी, जीभ से घुमाती। आर्यन की सांसें तेज। ‘नेहा… तू कमाल है।’ वह बोला। नेहा ने जोर-जोर से चूसा, लंड पर थूक लगाया। आर्यन सहन न कर सका, लेकिन रुका।

आर्यन ने नेहा को उल्टा किया। उसके नितंब ऊपर। चूत से लंड सटा दिया। धीरे से अंदर डाला। नेहा चीखी, ‘आह! दर्द हो रहा है।’ लेकिन आर्यन ने धीरे-धीरे धक्के मारे। चूत गीली थी, लंड आसानी से सरक रहा था। नेहा की कराहें बढ़ीं। ‘हां भैया… चोदो मुझे… तेज…’ आर्यन ने स्पीड बढ़ाई। लंड चूत में अंदर-बाहर। पॉप-पॉप की आवाज। नेहा के स्तन हिल रहे थे।

वे घंटों वहां रहे। अलग-अलग पोजिशन – नेहा ऊपर, आर्यन पीछे से। आखिर में आर्यन ने चूत में ही झड़ दिया। गर्म वीर्य नेहा के अंदर। दोनों थककर लेट गए। ‘भैया, मैं तुम्हें प्यार करती हूं।’ नेहा ने कहा। आर्यन ने चूमा। ‘मैं भी, नेहा।’

लेकिन यह सिर्फ शुरुआत थी। शाम को घर लौटे। सुनीता बुआ ने कुछ संदेह किया, लेकिन कुछ न कहा। रात में फिर वही कमरा। इस बार नेहा ने आर्यन को जगाया। ‘भैया, फिर से…’ उसने कहा। आर्यन ने उसे नंगा कर दिया। लंड मुंह में, फिर चूत में। लेकिन इस बार रोमांस ज्यादा था। चुम्बन, सहलाना। नेहा ने कहा, ‘मैं तुम्हारी हूं, हमेशा।’

अगले दिन वे खेतों में गए। वहां एक पुराने कुएं के पास। नेहा ने साड़ी पहनी थी। आर्यन ने उसे दीवार से सटा दिया। साड़ी ऊपर की, चूत में लंड डाला। तेज धक्के। नेहा दबी आवाज में कराही। ‘भैया… कोई देख लेगा।’ लेकिन मजा दोगुना था। आर्यन ने उसके मुंह पर हाथ रखा। चुदाई जारी। फिर नेहा ने घुटनों पर बैठकर लंड चूसा, स्वाद लिया।

छुट्टियां बीतने लगीं। हर पल उनके बीच आग लगी रहती। एक रात बारिश हुई। खिड़की से पानी टपक रहा था। नेहा नंगी लेटी, आर्यन उसके ऊपर। लंड चूत में गहरा। धीमे धक्के, रोमांटिक। ‘नेहा, तू मेरी जान है।’ आर्यन बोला। नेहा ने पैर लपेट लिए। ‘चोदो मुझे ऐसे ही, भैया।’ orgasm एक साथ आया।

लेकिन सुनीता बुआ को शक हो गया। एक दिन उन्होंने नेहा को डांटा। ‘क्या हो रहा है घर में?’ नेहा रो पड़ी। आर्यन ने बुआ से बात की। ‘बुआ, हम प्यार करते हैं।’ सुनीता स्तब्ध। लेकिन आखिरकार मान गईं। ‘बस, शादी कर लो।’

आर्यन शहर लौटा, लेकिन वादा किया लौटने का। नेहा ने विदाई में चूमा। ‘जल्दी आना, भैया। तेरी चूत इंतजार करेगी।’ आर्यन हंसा। उनकी कहानी जारी थी – प्यार, सेक्स, और गांव की मस्ती में।

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