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Army Officer Ki Kuwari Biwi Sex Story

Published On: March 23, 2026
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Army Officer Ki Kuwari Biwi Sex Story – मैं रोहन हूँ, महज 21 साल का एक साधारण सा लड़का, जो दिल्ली की भागदौड़ भरी जिंदगी में खुद को संभालने की कोशिश कर रहा हूँ। आज मैं आपको अपनी जिंदगी का एक ऐसा राज़ खोलने जा रहा हूँ, जो मेरे दिल की गहराइयों से निकला है। ये कहानी है एक अकेली औरत की, जो शादी के बंधन में बंधी होने के बावजूद कुंवारी ही रही।

दिल्ली के एक पॉश इलाके में, मैं पिछले साल से एक आर्मी कैप्टन के घर में टेनेंट के तौर पर रहता हूँ। कैप्टन राजेश साल के दस महीने बाहर ड्यूटी पर रहते हैं, और उनकी नई दुल्हन, नेहा, अकेले एक बूढ़ी नौकरानी के साथ घर संभालती है। जब मैं यहाँ आया, तो नवंबर की ठंडी हवाएँ दिल्ली को और भी उदास बना रही थीं। पहली बार घर से दूर, अपनी पढ़ाई के लिए आया था मैं, और ऊपर से सर्दियों में अकेलापन ऐसा घेरता था कि रातें कटने का नाम ही नहीं लेतीं।

नेहा दीदी को पहली नजर में ही देखा था मैंने। वो शायद 24-25 साल की होंगी, गोरी-चिट्टी, लंबे काले बाल, और वो आँखें जो उदासी से भरी हुईं लगती थीं। शादी के छह महीने हो चुके थे, लेकिन कैप्टन साहब की पोस्टिंग बॉर्डर पर थी, तो वो घर लौटे ही नहीं थे। नेहा दीदी ज्यादातर साड़ी पहनतीं, सिंपल सी, लेकिन उनकी कमर की लचक और चाल में कुछ ऐसा था जो किसी को भी आकर्षित कर दे। घर का ऊपरी हिस्सा मेरा था, नीचे उनका। सुबह-सुबह चाय की खुशबू आती, और कभी-कभी नेहा दीदी की हल्की हँसी नौकरानी लक्ष्मी के साथ।

पहले कुछ दिन तो सब सामान्य रहा। मैं कॉलेज जाता, शाम को लौटता, और रात को किताबों में खो जाता। लेकिन एक रात, बारिश हो रही थी। बिजली चली गई थी, और अंधेरे में मैं फोन की टॉर्च से चाय बना रहा था। तभी दरवाजे पर दस्तक हुई। खोला तो नेहा दीदी खड़ी थीं, हाथ में एक प्लेट, जिसमें गर्मागर्म समोसे थे। “रोहन भाई, अकेले हो ना? ये ले लो, लक्ष्मी ने बनाए हैं।” उनकी आवाज़ में वो कोमलता थी जो दिल को छू गई। मैंने उन्हें अंदर आने को कहा, लेकिन वो मुस्कुराईं और चली गईं। उस रात से कुछ बदल गया। मैं उनकी तरफ ज्यादा ध्यान देने लगा।

दिन बीतते गए। दिसंबर आ गया, क्रिसमस का समय। दिल्ली की सड़कें रौशन थीं, लेकिन मेरा मन उदास। घरवालों को मिस कर रहा था। एक शाम, मैं बालकनी में खड़ा सिगरेट पी रहा था, तभी नेहा दीदी नीचे गार्डन में दिखीं। वो फूलों को पानी दे रही थीं। उनकी साड़ी का पल्लू हवा में लहरा रहा था, और कमर पर बंधी पेटीकोट की लाइन साफ दिख रही थी। मैंने आवाज़ दी, “दीदी, ऊपर आ जाओ ना, चाय पियोगी?” वो हिचकिचाईं, लेकिन आ गईं। हम साथ बैठे चाय पीते रहे। बातें हुईं – उनकी शादी की, कैप्टन साहब की ड्यूटी की, मेरी पढ़ाई की। नेहा दीदी ने बताया कि वो छोटे शहर से हैं, और दिल्ली का ये अकेलापन उन्हें खा रहा है। “राजेश जी तो फोन पर ही बात करते हैं, घर आएंगे तो साल भर बाद।” उनकी आँखें नम हो गईं। मैंने उनका हाथ थाम लिया, “दीदी, आप अकेली नहीं हो। मैं हूँ ना।”

उस स्पर्श से कुछ बिजली सी दौड़ गई। नेहा दीदी शरमा गईं, लेकिन हाथ नहीं हटाया। रात गहरा रही थी। लक्ष्मी सो चुकी थी। हमारी बातें गहरी हो गईं। मैंने अपनी जिंदगी के बारे में बताया, कैसे पहली बार किसी लड़की से प्यार हुआ था कॉलेज में, लेकिन वो टूट गया। नेहा दीदी हँसीं, “तुम्हारे जैसे जवान लड़के को तो ढेर सारी लड़कियाँ मिलेंगी।” मैंने कहा, “लेकिन दीदी जैसी नहीं।” वो चुप हो गईं। फिर अचानक, उन्होंने कहा, “रोहन, क्या तुम्हें कभी अकेलापन महसूस होता है?” मैंने हाँ कहा, और हमारी नजरें मिलीं।

अगले दिन से हमारी मुलाकातें बढ़ गईं। सुबह चाय साथ पीते, शाम को गपशप। नेहा दीदी अब ज्यादा खुलने लगीं। एक दिन उन्होंने अपना कमरा दिखाया। कैप्टन साहब की फोटो दीवार पर, लेकिन बेड पर अकेले सोने की उदासी। “ये शादी सिर्फ नाम की है,” उन्होंने कहा। मैंने उन्हें गले लगा लिया। वो काँप गईं, लेकिन विरोध नहीं किया। मेरे होंठ उनके गाल को छू गए। नेहा दीदी की साँसें तेज हो गईं। “रोहन, ये गलत है…” लेकिन उनकी आँखें कुछ और कह रही थीं।

धीरे-धीरे हमारी नजदीकियाँ बढ़ीं। एक रात, लक्ष्मी को छुट्टी मिली थी। घर में सिर्फ हम दो। नेहा दीदी ने डिनर बनाया। खाने के बाद, हम सोफे पर बैठे थे। टीवी चल रहा था, लेकिन हमारी नजरें एक-दूसरे पर। मैंने उनका हाथ पकड़ा, और इस बार किस कर लिया। नेहा दीदी की जीभ मेरी जीभ से मिली। उनका शरीर गर्म हो गया। मैंने उनकी साड़ी का आँचल सरका दिया। उनके ब्लाउज के नीचे भरे हुए स्तन उभर आए। “दीदी, तुम कितनी सुंदर हो,” मैंने फुसफुसाया। उन्होंने मेरी शर्ट उतार दी। मेरा सीना छूते हुए वो बोलीं, “रोहन, मुझे डर लग रहा है, लेकिन रोक नहीं पा रही।”

मैंने उन्हें बेडरूम में ले जाया। नेहा दीदी को बेड पर लिटाया। उनकी साड़ी खोल दी। पेटीकोट के नीचे उनकी चूत साफ दिख रही थी, जो कभी छुई भी नहीं गई थी। मैंने उनके स्तनों को चूमा, निप्पल्स को चूसा। नेहा दीदी कराहने लगीं, “आह… रोहन…” मेरा लंड कड़ा हो गया। मैंने पैंट उतारी, और अपना लंड उनके हाथ में दे दिया। वो शर्मा गईं, लेकिन सहलाने लगीं। “ये इतना बड़ा…” उन्होंने कहा। मैंने उनके पैर फैलाए, और जीभ से उनकी चूत चाटने लगा। नेहा दीदी चिल्लाईं, “ओह गॉड… क्या कर रहे हो…” उनका रस बहने लगा।

फिर मैंने अपना लंड उनकी चूत पर रगड़ा। नेहा दीदी डर गईं, “नहीं रोहन, दर्द होगा।” लेकिन मैं धीरे से अंदर डाल दिया। खून निकला, वो कुंवारी थीं सच में। नेहा दीदी रोने लगीं, लेकिन जल्दी ही आनंद में बदल गया। मैंने जोर-जोर से धक्के मारे। “फक मी हार्डर…” वो चीखीं। हम दोनों पसीने से तर हो गए। आखिरकार, मैंने उनके अंदर झड़ दिया। नेहा दीदी गले लग गईं, “धन्यवाद रोहन, तुमने मुझे जिंदा कर दिया।”

उस रात से हमारी जिंदगी बदल गई। हर रात हम साथ सोते। नेहा दीदी ने मुझे सिखाया कैसे स्तनों को दबाना है, कैसे चूत को चूसना है। कभी मैं उन्हें डॉगी स्टाइल में चोदता, कभी वो ऊपर बैठकर मेरे लंड पर उछलतीं। लक्ष्मी को शक नहीं हुआ, क्योंकि हम सतर्क रहते। लेकिन एक दिन, कैप्टन साहब का फोन आया। नेहा दीदी ने बात की, लेकिन उनकी आँखें मुझ पर थीं। “हाँ जी, सब ठीक है,” वो बोलीं, जबकि मैं उनके नीचे से चोद रहा था।

महीने बीतते गए। नेहा दीदी प्रेग्नेंट हो गईं। हम डर गए, लेकिन खुश भी। मैंने कहा, “ये मेरा बच्चा है।” वो मुस्कुराईं, “हाँ, हमारा।” कैप्टन साहब लौटे, लेकिन तब तक नेहा दीदी ने फैसला कर लिया था। उन्होंने तलाक माँगा। कैप्टन साहब को सच्चाई पता चली, लेकिन आर्मी की इज्जत के लिए चुप रह गए। अब नेहा और मैं साथ हैं, दिल्ली की इस बड़ी शहर में अपना छोटा सा परिवार।

ये थी मेरी कहानी, प्यारे दोस्तों। अकेलापन इंसान को कितना बदल देता है, ये नेहा दीदी से सीखा मैंने। अगर आपकी जिंदगी में भी ऐसा कुछ हो, तो हिम्मत रखना। नमस्ते।

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