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Bhai Ne Bahan Ko Kabbadi Me Chod Diya | Desi Tales

Published On: March 23, 2026
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अध्याय 1: गर्मी की दोपहर

 

Bhai Ne Bahan Ko Kabbadi Me Chod Diya – गर्मियों की वह दोपहर थी जब सूरज आकाश में चमक रहा था, मानो पूरी दुनिया को जलाने पर तुला हो। गांव के बाहर, पुराने आम के बगीचे में, आर्यन और उसकी बहन सिया खेल रहे थे। आर्यन उम्र में सिया से तीन साल बड़ा था, बीस साल का जवान, जिसका शरीर मजबूत और फिट था। कबड्डी के खेल से उसकी मांसपेशियां चमक रही थीं, पसीने से तरबतर। सिया अठारह की थी, स्कूल की छुट्टियों में घर लौटी हुई। उसकी काया नाजुक लेकिन आकर्षक थी, लंबे बाल और चमकदार आंखें जो भाई को हमेशा चिढ़ातीं।

वे दोनों बचपन से कबड्डी खेलते आए थे। पिता शहर में नौकरी करते थे, मां घर संभालती, तो भाई-बहन अकेले ही समय बिताते। आज का खेल कुछ अलग था। सिया ने चुनौती दी थी, ‘भैया, अगर मैंने तुम्हें छुआ तो हार मानना!’ आर्यन हंस पड़ा, ‘देख लेना, तू मेरे सामने टिक नहीं पाएगी।’ वे मैदान पर आम के पेड़ों के बीच खड़े हो गए। हवा में आमों की महक थी, और दूर से कुत्तों की भौंकने की आवाज आ रही थी।

आर्यन ने रेड मारी। वह तेजी से दौड़ा, सिया की ओर लपका। ‘कबड्डी, कबड्डी!’ चिल्लाते हुए उसने सिया को पकड़ने की कोशिश की। सिया चकमा दे गई, लेकिन आर्यन का हाथ उसके कंधे पर पड़ गया। पसीने से गीली उसकी टी-शर्ट चिपक गई, और सिया की सांसें तेज हो गईं। ‘छोड़ो भैया!’ वह हंसते हुए बोली, लेकिन आर्यन ने उसे जोर से खींच लिया। दोनों गिर पड़े घास पर। सिया के बाल बिखर गए, और उसकी कमीज ऊपर सरक गई, पेट की नरम त्वचा दिख गई।

आर्यन का दिल धड़क रहा था। बहन का स्पर्श कुछ अलग लग रहा था। बचपन में ये खेल सामान्य थे, लेकिन अब किशोरावस्था ने सब बदल दिया था। सिया ने उसे धक्का दिया, ‘उठो ना, अब मेरी बारी!’ वह उठी, धूल झाड़ी। उसके होंठों पर शरारत भरी मुस्कान थी।

अध्याय 2: खेल की उत्तेजना

सिया की रेड शुरू हुई। वह छोटी-छोटी कदमों से आर्यन के पास पहुंची। ‘कबड्डी!’ उसकी आवाज मधुर लेकिन चुनौतीपूर्ण। आर्यन ने उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन सिया तेज थी। उसने आर्यन के कमर को छुआ, और तुरंत पीछे हट गई। ‘हार गए भैया!’ वह चिल्लाई, जीत की खुशी में उछल पड़ी। आर्यन ने उसे पकड़ लिया, ‘नहीं, तूने ठीक से नहीं छुआ!’ दोनों फिर से लड़ने लगे।

इस बार गिरावट में सिया आर्यन के ऊपर गिर गई। उसके स्तन आर्यन की छाती से दब गए। समय रुक सा गया। सिया की सांसें गर्म थीं, उसके गाल लाल हो गए। आर्यन ने महसूस किया कि उसके शरीर में कुछ हलचल हो रही है। लिंग कठोर हो रहा था, पैंट में तनाव महसूस हो रहा। ‘सिया, उठ… उठ जा,’ वह बोला, लेकिन आवाज कांप रही थी। सिया ने ऊपर देखा, भाई की आंखों में कुछ अजीब था।

वे दोनों अलग हुए, लेकिन हवा में तनाव था। खेल जारी रहा। अगली रेड में आर्यन ने सिया को पकड़ लिया। उसका हाथ सिया की जांघ पर फिसला। सिया सिहर उठी। ‘भैया, क्या कर रहे हो?’ लेकिन उसकी आवाज में डर कम, उत्सुकता ज्यादा थी। आर्यन ने उसे कसकर पकड़ा, ‘खेल है ना, बहन।’ वे फिर गिरे, इस बार आर्यन सिया के ऊपर।

सिया की स्कर्ट ऊपर सरक गई, उसकी गांड की गोलाई दिख रही थी। आर्यन का लंड पूरी तरह खड़ा हो गया, सिया की जांघ से सट गया। सिया ने महसूस किया, वह चौंकी। ‘भैया… ये क्या?’ लेकिन वह हिली नहीं। आर्यन का मन पागल हो रहा था। बहन का शरीर इतना नरम, इतना गर्म। वह धीरे से सिया के होंठों पर अपना मुंह रख दिया। सिया ने विरोध नहीं किया, बल्कि आंखें बंद कर लीं।

चुंबन गहरा हो गया। आर्यन की जीभ सिया के मुंह में घुस गई, चूसने लगी। सिया के हाथ आर्यन की पीठ पर फिरने लगे। खेल भूल चुके थे दोनों। आर्यन ने सिया की कमीज ऊपर की, उसके स्तनों को छुआ। निप्पल कठोर हो चुके थे। वह उन्हें चूसने लगा, जोर-जोर से। सिया कराह उठी, ‘आह… भैया…’ उसके हाथ आर्यन की पैंट पर गए, लंड को सहलाया।

अध्याय 3: वर्जना का टूटना

बगीचे की शांति में उनकी सांसें गूंज रही थीं। आर्यन ने सिया की स्कर्ट पूरी तरह उतार दी। उसकी चूत गीली थी, बाल कम थे। आर्यन ने उंगली डाली, सिया चीखी, ‘दर्द हो रहा है!’ लेकिन आनंद भी था। आर्यन ने अपनी पैंट उतारी, लंड बाहर आ गया – मोटा, लंबा, सिरा चमकदार। सिया ने उसे देखा, आंखें फैल गईं। ‘भैया, इतना बड़ा…’

आर्यन ने सिया को घुमाया, डॉगी स्टाइल में। उसकी गांड ऊपर की। वह लंड को चूत पर रगड़ने लगा। सिया कांप रही थी। ‘भैया, डरो मत ना… डाल दो।’ आर्यन ने धक्का दिया। चूत टाइट थी, लंड आधा ही घुसा। सिया चिल्लाई, ‘आह! मार डाला!’ लेकिन आर्यन रुका नहीं। पूरा लंड अंदर चला गया। खून निकला थोड़ा, कुंवारी थी सिया।

वह जोर-जोर से ठोकने लगा। पॉप-पॉप की आवाज गूंजी। सिया की चीखें आनंद में बदल गईं, ‘हां भैया… चोदो मुझे… तेज!’ आर्यन के हाथ सिया के स्तनों पर थे, निप्पल मरोड़ रहा था। पसीना दोनों पर बह रहा था। सिया की चूत लंड को चूस रही थी। आर्यन ने स्पीड बढ़ाई, ‘रंडी बहन… तेरी चूत कितनी टाइट है!’ सिया ने पीछे से गांड हिलाई, ‘हां भैया… मैं तेरी रंडी हूं।’

वे पोजीशन बदले। सिया ऊपर आ गई, काउगर्ल में। वह लंड पर उछलने लगी। उसके स्तन लॉबते हुए। आर्यन नीचे से धक्के मार रहा था। ‘चोद भैया… भर दो मुझे!’ सिया की चूत से रस बह रहा था। आर्यन ने उसे पकड़ लिया, जोर से चोदा। चरम आने वाला था। ‘सिया… आ रहा हूं!’ सिया ने कहा, ‘अंदर ही डालो भैया!’ गर्म वीर्य चूत में छूट गया। सिया भी कांपकर झड़ी।

अध्याय 4: बाद की शाम

वे दोनों थककर लेटे रहे। सूरज ढल रहा था। सिया ने आर्यन का सिर अपनी गोद में रखा। ‘भैया, ये गलत था ना?’ आर्यन ने कहा, ‘प्यार है बहन, गलत कुछ नहीं।’ वे कपड़े पहने, घर लौटे। रात को बिस्तर पर फिर वही हुआ। सिया ने मुंह में लंड लिया, चूसा। आर्यन ने गले तक ठोका। फिर गांड मारी। सिया रोई लेकिन मज़ा आया।

अगले दिन कबड्डी का खेल फिर शुरू हुआ, लेकिन अब इसमें नया रंग था। हर छुअन में सेक्स छिपा था। गांव वालों को शक नहीं हुआ। भाई-बहन का रिश्ता गहरा हो गया। सिया की चूत हमेशा गीली रहने लगी भैया के ख्याल से। आर्यन का लंड बहन के लिए तड़पने लगा।

अध्याय 5: गुप्त मिलन

कुछ दिनों बाद, पिता-मां शहर गए। घर अकेला। आर्यन और सिया ने मौका उठाया। सुबह से शाम तक चुदाई। किचन में, सिया झुककर बर्तन धो रही थी, आर्यन पीछे से लंड डाल दिया। ‘आह भैया!’ सिया की चीख। वह जोर-जोर से पेला। फिर बाथरूम में। सिया नहा रही थी, आर्यन अंदर घुसा। साबुन लगाकर चोदा। पानी बह रहा, चूत फिसलन भरी।

रात को बेड पर। सिया ने बॉन्डेज खेला। हाथ बांधे, आंखें बंद। आर्यन ने व्हिप मारा हल्का। फिर चोदा। सिया चिल्लाई, ‘मारो भैया… सजा दो मुझे!’ लंड चूत में, गांड में वैकल्पिक। वीर्य हर जगह। सिया की चूत लाल हो गई।

अध्याय 6: खतरे की घंटी

एक दिन दोस्त आया, शक हुआ। लेकिन वे सतर्क हो गए। कबड्डी अब बहाना था। जंगल में मिलते, चोदते। सिया प्रेग्नेंट हो गई। डर लगा, लेकिन खुशी भी। आर्यन ने कहा, ‘शादी करेंगे हम।’ वे भागने की योजना बनाई।

कहानी खत्म नहीं हुई। उनका प्यार जारी रहा, कबड्डी की तरह – छूना, पकड़ना, चोदना।

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