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Bhai Ne Didi Ki Chut Faadi Biwi Samjkar

Published On: March 23, 2026
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Bhai Ne Didi Ki Chut Faadi Biwi Samjkar – गर्मियों की एक शाम थी, जब गांव की हवा में मिट्टी की सोंधी खुशबू फैली हुई थी। राजेश, एक 28 साल का जवान किसान, अपने खेतों से लौट रहा था। उसकी शादी को अभी छह महीने ही हुए थे, लेकिन उसकी बीवी राधा शहर में मायके गई हुई थी। राजेश का मन उदास था, रातें अकेले कट रही थीं। घर पहुंचते ही उसने देखा कि उसकी बड़ी बहन प्रिया, जो 25 साल की थी, रसोई में खाना बना रही थी। प्रिया की शादी टूट चुकी थी, इसलिए वह मायके लौट आई थी। दोनों भाई-बहन बचपन से ही करीब थे, लेकिन अब जवान हो जाने के बाद उनकी नजदीकी में एक अजीब सी तनाव था।

प्रिया ने राजेश को देखा तो मुस्कुराई। ‘भैया, आ गए? आज खेत में देर हो गई।’ उसकी आवाज मीठी थी, लेकिन राजेश का मन कहीं और था। शाम को गांव में मेला लगा था, दोस्तों ने उसे बुलाया था। ‘हां दीदी, थोड़ा काम बाकी था। मैं शाम को मेला चला जाऊंगा, तुझे भी चलना है?’ प्रिया ने सिर हिलाया, ‘नहीं भैया, मैं थक गई हूं। तुम जाओ।’ राजेश ने खाना खाया और निकल पड़ा।

मेले में शराब की दुकान पर उसके दोस्त इंतजार कर रहे थे। ‘आजा राजू, आज मजा करेंगे!’ उन्होंने शराब के गिलास थमाए। राजेश ने पीना शुरू किया। धीरे-धीरे नशा चढ़ा, और वह अपनी बीवी राधा को याद करने लगा। राधा की तरह प्रिया भी गोरी थी, लंबे बाल, पतली कमर। नशे में सब कुछ घुलमिल जाता है। रात के दस बजे तक वह घर लौटा, लेकिन पैर लड़खड़ा रहे थे। घर अंधेरा था, बिजली चली गई थी। प्रिया सोने की तैयारी कर रही थी, लेकिन उसने राजेश को दरवाजे पर सुना तो उठी। ‘भैया, आ गए? मैं पानी लाती हूं।’

राजेश ने अंधेरे में प्रिया को देखा। नशे की वजह से उसकी आंखें धुंधली थीं। प्रिया ने साड़ी पहनी थी, जो हल्के से खिसक गई थी, उसके कंधे नंगे दिख रहे थे। राजेश का दिल धड़का। ‘राधा… तू आ गई?’ वह बुदबुदाया। प्रिया चौंकी, ‘क्या कह रहे हो भैया? मैं प्रिया हूं।’ लेकिन राजेश ने सुना ही नहीं। वह सीधा प्रिया की ओर लपका और उसे गले लगा लिया। ‘राधा, मुझे तेरी इतनी याद आई। आज रात तू मेरी है।’

प्रिया डर गई, लेकिन भाई का नशा देखकर उसे लगा कि शायद सुबह ठीक हो जाएगा। ‘भैया, छोड़ो, मैं दीदी हूं।’ लेकिन राजेश ने उसे बेडरूम में खींच लिया। कमरे में मंद रोशनी थी, मोमबत्ती जल रही थी। राजेश ने प्रिया को बिस्तर पर धकेल दिया। ‘क्यों शरमा रही है मेरी बीवी? आज मैं तुझे चोदूंगा।’ प्रिया ने विरोध किया, लेकिन राजेश की ताकत ज्यादा थी। उसने प्रिया की साड़ी खींच ली। प्रिया के स्तन बाहर आ गए, गोल और सख्त। राजेश ने उन्हें दबाया, ‘वाह राधा, तेरे बूबे कितने नरम हैं।’

प्रिया की सांसें तेज हो गईं। सालों से वह अकेली थी, शादी टूटने के बाद कोई छुआ भी न था। भाई का स्पर्श एकदम अलग था, गर्म और जंगली। ‘भैया, रुको… ये गलत है।’ लेकिन राजेश ने उसकी चोली फाड़ दी। प्रिया के निप्पल सख्त हो चुके थे। राजेश ने अपना मुंह लगाया और चूसने लगा। प्रिया की चीख निकली, लेकिन आनंद की लहर दौड़ गई। ‘आह… भैया…’ वह खुद को रोक न सकी।

राजेश ने अपनी पैंट उतारी। उसका लंड खड़ा था, मोटा और लंबा, नसें फूली हुईं। ‘देख राधा, ये तेरे लिए तैयार है।’ वह प्रिया की साड़ी के आंचल में हाथ डाला और पेटीकोट खींचा। प्रिया की चूत नंगी हो गई, बालों से ढकी, गीली। राजेश ने उंगली डाली, ‘वेट हो गई मेरी बीवी। अब चुदाई का समय है।’ प्रिया ने पैर जोड़े, लेकिन राजेश ने उन्हें फैला दिए। वह लंड को चूत पर रगड़ने लगा। प्रिया का शरीर कांप रहा था। ‘नहीं भैया, ये भाई-बहन का रिश्ता है।’

लेकिन नशे में राजेश रुका नहीं। एक झटके में उसने लंड अंदर धकेल दिया। प्रिया चीखी, ‘आह! दर्द हो रहा है!’ राजेश का लंड इतना मोटा था कि प्रिया की चूत फटने लगी। खून निकला, लेकिन राजेश ने पंपिंग शुरू कर दी। ‘चोद रहा हूं तुझे राधा, तेरी चूत कितनी टाइट है।’ प्रिया रो रही थी, लेकिन धीरे-धीरे दर्द आनंद में बदल गया। उसके कूल्हे खुद हिलने लगे। ‘भैया… हां… और जोर से।’ वह भूल गई कि ये गलत है।

राजेश ने प्रिया को डॉगी स्टाइल में घुमाया। उसके गांड को थप्पड़ मारा, ‘तेरी गांड कितनी सेक्सी है।’ फिर लंड चूत में घुसेड़ा। प्रिया की चीखें कमरे में गूंजीं। ‘फाड़ दो मेरी चूत भैया!’ राजेश तेजी से चोद रहा था, पसीना टपक रहा था। प्रिया के स्तन लटक रहे थे, वह उन्हें दबा रही थी। ‘कमिंग… आह!’ प्रिया झड़ गई, उसकी चूत से रस बहने लगा। राजेश ने भी जोर लगाया और स्पर्म छोड़ दिया। ‘ले ले मेरी बीवी, मेरा रस।’

दोनों थककर लेट गए। सुबह राजेश की आंख खुली तो उसे सब याद आ गया। प्रिया सो रही थी, नंगी। राजेश शॉक्ड हो गया। ‘ये क्या कर दिया मैंने? दीदी…’ लेकिन प्रिया जागी और मुस्कुराई। ‘भैया, कल रात… वो गलती थी, लेकिन…’ वह शर्मा गई। राजेश ने उसे गले लगाया। ‘माफ कर दीदी, नशे में…’ लेकिन प्रिया ने कहा, ‘नहीं भैया, मुझे अच्छा लगा। अब हमारा रिश्ता बदल गया।’

उस दिन से दोनों के बीच एक नया बंधन बन गया। गांव की जिंदगी जारी थी, लेकिन रातें अब अलग थीं। राजेश खेत से लौटता तो प्रिया इंतजार करती। एक रात, बिजली फिर गई। राजेश ने प्रिया को बुलाया। ‘दीदी, आज फिर…’ प्रिया हंस पड़ी। ‘अब बीवी मत समझना, लेकिन चोद सकते हो।’ राजेश ने उसे नंगा किया। प्रिया की चूत अब तैयार थी, गीली। वह लंड मुंह में लेने लगी, ‘ब्लोजॉब दूंगी भैया।’ राजेश का लंड चूसते हुए वह आंखें बंद कर ली।

फिर राजेश ने प्रिया को बिस्तर पर लिटाया। मिशनरी पोजिशन में चुदाई शुरू। ‘तेरी चूत मेरी है अब।’ प्रिया के पैर कंधों पर रखे, गहराई से धक्के। ‘हां भैया, फाड़ दो। गैंगबैंग जैसा महसूस हो रहा, लेकिन सिर्फ तुम्हारा।’ वे हंस पड़े। राजेश ने स्पीड बढ़ाई, प्रिया के निप्पल चूसे। चरम पर पहुंचे तो दोनों एक साथ झड़े। स्पर्म चूत में भर गया।

दिन बीतते गए। प्रिया गर्भवती हो गई। राजेश खुश था। ‘ये हमारा बच्चा है दीदी।’ गांव वालों को लगा कि प्रिया की शादी फिर हो गई, लेकिन सच सिर्फ दोनों को पता था। राधा लौटी तो राजेश ने उसे सब बता दिया। राधा शॉक्ड हुई, लेकिन फिर शामिल हो गई। अब तीनों की चुदाई होती। एक रात, राधा और प्रिया दोनों नंगी। राजेश का लंड प्रिया की चूत में, राधा की गांड में। ‘ट्रिपल प्ले भैया!’ वे चिल्लाए।

लेकिन ये सब गुप्त था। राजेश और प्रिया का रिश्ता भाई-बहन से प्रेमी बन गया। चूत फाड़ने वाली वो रात अब यादों की मिठास थी। गांव की हवा में अब सेक्स की खुशबू घुली रहती।

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