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Chudakkad Maa Ko Range Hathon Pakdi Fir Beti Bhi Shamil Ho Gyi

Published On: March 23, 2026
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Chudakkad Maa Ko Range Hathon Pakdi Fir Beti Bhi Shamil Ho Gyi – रात का समय था। घर की पुरानी कोठरी में हल्की सी रोशनी फैली हुई थी, जो दीवारों पर लंबी-लंबी परछाइयाँ डाल रही थी। मधुमती, 40 साल की वो गरम जोशी वाली औरत, अपनी बेडरूम की अलमारी के पास खड़ी थी। उसके मोटे हाथों में एक पुरानी डायरी थी, लेकिन उसका दिमाग कहीं और भटक रहा था। सालों से दबी हुई वो आग, जो उसके बदन में सुलग रही थी, आज बाहर आने को बेताब थी।

उसकी बेटी पूजा, 18 साल की जवान लड़की, अभी-अभी नहाकर कमरे में आई थी। उसकी पतली कमर पर लिपटा तौलिया, और नंगी टांगें चमक रही थीं पानी की बूंदों से। मधुमती ने चुपके से देखा, कैसे पूजा का बदन जवानी से भरा हुआ था।

मधुमती की नजरें पूजा की कमर पर टिक गईं। वो जानती थी कि ये गलत है, लेकिन उसकी जोश वाली रगें ये सब भूल चुकी थीं। अचानक, वो आगे बढ़ी और अपने रंगीले मोटे हाथों से पूजा की नंगी कमर को जोर से पकड़ लिया। तौलिया सरक गया, और पूजा का बदन आधा नंगा हो गया।

मधुमती की नजर से:

मैंने पूजा की कमर को अपने मोटे हाथों में कसकर जकड़ लिया। उसकी त्वचा कितनी मुलायम थी, गर्म और नरम। मेरी उंगलियाँ उसके पेट पर दब रही थीं, और मैं महसूस कर रही थी कि उसका बदन मेरे स्पर्श से सिहर उठा। ‘पूजा, तू कितनी हसीन हो गई है,’ मैंने फुसफुसाया, मेरी सांसें तेज हो रही थीं।

सालों से ये इच्छा दबी थी, अब बाहर आ रही थी। मैंने उसे अपनी ओर खींचा, उसके नंगे कूल्हों को छुआ। वो चौंकी, लेकिन मैंने नहीं छोड़ा। मेरी बड़बड़ी उंगलियाँ उसकी नाभि के आसपास घूमने लगीं, धीरे-धीरे नीचे सरकती हुईं।

पूजा का चेहरा लाल हो गया। वो मेरी ओर मुड़ी, आंखों में हैरानी थी, लेकिन उसके बदन में भी वही आग सुलग रही थी जो मुझमें। ‘माँ, ये क्या कर रही हो?’ उसने कहा, लेकिन उसकी आवाज में डर कम और उत्सुकता ज्यादा थी। मैंने हंसते हुए कहा, ‘बस, तुझे छूना चाहती हूँ, मेरी रानी। तू मेरी है, सब कुछ।’ मेरे हाथ उसके स्तनों की ओर बढ़े, जो तौलिये से ढके थे। मैंने जोर से दबाया, और पूजा की सांस रुक गई।

पूजा की नजर से:

माँ के मोटे हाथ मेरी कमर पर थे, इतने जोर से पकड़े हुए कि दर्द हो रहा था, लेकिन एक अजीब सी सिहरन भी। मैं नंगी खड़ी थी, तौलिया गिर चुका था। मेरी टांगें कांप रही थीं, नंगी और गीली। ‘माँ, ये…’ मैं बोल नहीं पाई। उसके स्पर्श में कुछ था जो मुझे रोक नहीं पा रहा था। मैंने खुद को उसके हाथों में ढीला छोड़ दिया। मेरी पतली कमर उसके मोटे हथेलियों में फंस गई। मैंने हल्का सा मुस्कुराया, और उसके हाथ को अपनी ओर दबाया। ‘माँ, अगर तुम्हें अच्छा लगता है, तो…’ मैंने कहा, अपनी आवाज को सेक्सी बनाते हुए।

मैंने माँ की कमीज को खींचा, उसके बड़े स्तन बाहर आ गए। वो इतने भरे हुए थे, और मैंने बिना हिचकिचाहट के उन्हें छुआ। मेरी उंगलियाँ उसके निप्पल्स पर घूमीं, और माँ की सिसकी निकल गई। ‘पूजा, तू भी…’ वो बोलीं, लेकिन मैंने उन्हें चुप करा दिया। मैंने अपना बदन उनके करीब किया, मेरी नंगी टांगें उनकी जांघों से रगड़ खाने लगीं। ये गलत था, लेकिन इतना अच्छा लग रहा था। मैंने माँ के होंठों को चूमा, हल्का सा, लेकिन वो जवाब में मुझे जोर से चूमने लगीं।

मधुमती की नजर से:

पूजा के होंठ मेरे होंठों पर थे, नरम और गर्म। मैंने उसे बेड की ओर धकेला, हम दोनों गिर पड़े। मेरे मोटे हाथ उसके नंगे बदन पर फिरने लगे। मैंने उसके स्तनों को मुट्ठी में भरा, जोर से दबाया। ‘आह, पूजा, तेरी चूचियाँ कितनी टाइट हैं,’ मैंने कहा, अपनी जीभ से उसके निप्पल को चाटा। वो सिहर उठी, और मैंने देखा उसके चेहरे पर वही जोश। मेरी उंगलियाँ नीचे सरकीं, उसके पैंटी को खींच दिया। उसकी चूत गीली थी, बालों से भरी। मैंने अपनी बड़ी उंगली को उसके होंठों पर रगड़ा, फिर जोर से अंदर धकेल दिया।

पूजा चीखी, लेकिन आनंद से। ‘माँ, और… गहरा,’ वो बोली। मैंने दूसरी उंगली भी डाली, जोर-जोर से अंदर-बाहर करने लगी। उसकी चूत की दीवारें मेरी उंगलियों को चूस रही थीं। मैंने अपना मुंह उसके स्तन पर जमा दिया, चूसने लगी। हम दोनों नंगे थे अब, मेरे मोटे बदन का वजन उसके पतले बदन पर। ‘तू मेरी हो, पूजा। आज से हम साथ खेलेंगे ये रंगीला खेल,’ मैंने फुसफुसाया, अपनी उंगली को और तेज घुमाते हुए।

पूजा की नजर से:

माँ की उंगली मेरी चूत में थी, इतनी मोटी और लंबी कि दर्द और मजा दोनों हो रहे थे। मैंने अपनी टांगें फैला दीं, उसे और गहरा लेने का इशारा किया। ‘हाँ माँ, fuck me with your fingers,’ मैंने अंग्रेजी में कहा, लेकिन हिंदी में सोच रही थी। मेरे हाथ माँ की चूत की ओर गए। वो भी गीली थी, बालों वाली और गरम। मैंने अपनी उंगली डाली, जोर से। माँ की सिसकी सुनकर मुझे और जोश आ गया। ‘माँ, तुम्हारी चूत कितनी रसीली है,’ मैंने कहा, अपनी उंगली को अंदर घुमाते हुए।

हम दोनों एक-दूसरे को चूम रहे थे, जीभें लड़ रही थीं। मैंने माँ के गुदे को छुआ, हल्का सा दबाया। वो चौंकीं, लेकिन रुकीं नहीं। ‘पूजा, वहाँ भी?’ उन्होंने पूछा, आंखों में शरारत। मैंने हामी भरी, और अपनी उंगली उनके गुदे में डाल दी। वो चीखीं, लेकिन आनंद से। अब हम दोनों एक-दूसरे की गंदी जगहों पर उंगलियाँ चला रहे थे, जोर-जोर से। मेरी चूत से रस बह रहा था, माँ की उंगलियों पर। मैंने अपना मुंह उनके स्तन पर रखा, चूसने लगी, काटने लगी हल्का सा।

मधुमती की नजर से:

पूजा की उंगली मेरे गुदे में थी, दर्द भरा लेकिन उत्तेजक। मैंने उसे और गहरा करने को कहा। ‘हाँ बेटी, गहरा धकेल,’ मैं बोली, अपना बदन हिलाते हुए। मेरी दूसरी हाथ पूजा की चूत में थी, तीन उंगलियाँ अब, जोर से पेल रही थी। उसकी चीखें कमरे में गूंज रही थीं। मैंने अपना चेहरा नीचे किया, उसकी चूत को चाटने लगी। जीभ से उसके क्लिट को चूसा, दांतों से काटा हल्का। पूजा के पैर कांप रहे थे, वो झटके खा रही थी। ‘माँ, मैं… आ रही हूँ,’ वो बोली।

लेकिन मैं रुकी नहीं। मैंने अपनी जीभ को अंदर डाला, चूसने लगी। उसका रस मेरे मुंह में आ गया, मीठा और गर्म। अब पूजा ने मुझे उल्टा किया, मेरी चूत पर हमला बोला। उसकी जीभ मेरी चूत में घुस रही थी, चूस रही थी। मैंने उसके बाल पकड़े, सिर को दबाया। ‘चूस ले, मेरी रानी, सब पी ले,’ मैं चिल्लाई। हम दोनों के बदन पसीने से भीगे थे, नंगे और चिपचिपे।

पूजा की नजर से:

माँ की चूत का स्वाद मेरे मुंह में था, नमकीन और उत्तेजक। मैंने जीभ को तेज चलाया, उसके क्लिट को चूसा। माँ के मोटे जांघ मेरे चेहरे को जकड़ रही थीं। मेरी उंगली अभी भी उनके गुदे में थी, अंदर-बाहर। वो कराह रही थीं, जोर-जोर से। ‘पूजा, तू कितनी चुदक्कड़ है,’ उन्होंने कहा, हंसते हुए। मैंने जवाब में उनके गुदे में दूसरी उंगली डाली। अब वो चीख पड़ीं, लेकिन रुकीं नहीं।

हमने पोजीशन बदली। मैं ऊपर आ गई, अपना बदन माँ के ऊपर रगड़ रही थी। मेरी चूत उनकी चूत से रगड़ खा रही थी, गीली-गीली। ‘माँ, ये tribbing क्या मजा है,’ मैं बोली, हिप्स हिलाते हुए। वो नीचे से मुझे पकड़ रही थीं, अपने मोटे हाथों से मेरी गांड दबा रही थीं। हमारी चूतें आपस में टकरा रही थीं, रस मिल रहा था। सिसकियाँ और कराहें कमरे भर रही थीं।

मधुमती की नजर से:

पूजा का बदन मेरे ऊपर था, पतला लेकिन जोशीला। मैंने अपनी उंगलियाँ फिर से उनकी चूत में डालीं, लेकिन अब गांड में भी। डबल पेनिट्रेशन जैसा। वो चिल्लाई, लेकिन और जोर से हिलने लगी। ‘माँ, fuck my ass too,’ वो बोली। मैंने अपनी मोटी उंगली उनके गुदे में घुमाई, जोर से। मेरी चूत अब भी उनकी चूत से रगड़ रही थी। अचानक, दरवाजे की आवाज आई। कोई आ रहा था? लेकिन हम रुके नहीं। जोश में डूबे थे।

मैंने पूजा को चूमा, गहरा। ‘कौन आया भी तो, हम जारी रखेंगे,’ मैंने कहा। लेकिन तभी…

पूजा की नजर से:

माँ की उंगलियाँ मेरी गांड और चूत दोनों में थीं, दर्द और आनंद का मिश्रण। मैं झटके खा रही थी, ऑर्गेज्म के करीब। दरवाजा खुला, लेकिन हमारी परवाह नहीं। शायद पापा? लेकिन जो भी हो, ये खेल रुकेगा नहीं। मेरी सांसें तेज, बदन कांप रहा। ‘माँ, और… मत रुको,’ मैं बोली, और हम फिर से खो गए…

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